"चाय में बिस्कुट डुबो कर नहीं खाया कभी क्या ", एक लड़के ने अपना स्कूल का बस्ता ठीक करते हुए चाय का गिलास किनारे रख कर पूछा , लड़का अपने
साथी के साथ , चाय में बिस्कुट डुबो डुबो कर खा रहा था , छोटे से दड़बे में यह चाय की दुकान व्यास के किनारे , शहर से कोई एक किलोमीटर दूर , लुग्गड़ भट्टी में
बहुत सालों के बाद वहां जाना हुआ , अक्सर जब भी पहाड़ पर जाता था , एक लम्बी दौड़ के बाद उस चाय की दुकान पर चाय ज़रूर पीता था
शाम ढल रही थी , लड़के ने फिर पूछा , कौन से देश से आये हो , मैंने कहा यहीं का हूँ , लड़कों ने बहुत विस्मय से मेरी तरफ देखा ,
दुकानदार ने अपना चाय का पैन ठीक करते हुए , चूल्हे में और लकड़ियां डाल दीं , पूरा दड़वा , रौशनी से भर गया ,
दुकानदार ने पलट कर पूछा।
किस से बातें कर रहे हो साहेब ,
सामने की बेंच पर कोई नहीं था , चाय का गिलास मेरे हाथों से गिरते- गिरते बच्चा , अरे वही स्कूल के दो लड़के जो चाय में बिस्कुट डुबो- डुबो कर खा रहे थे और सुड़ुक सुड़ुक चाय पी रहे थे ,
आप का भरम होगा साहेब इस दूकान में शाम को आप पहले ग्राहक हो , उसने अपना सुथणु कमर से ऊपर खिसकाते हुए कहा ,
रौशनी में बूढ़े आदमी का चेहरा चमक रहा था , उसने चिमटे से लकड़ी ठीक करते हुए कहा , १५ साल पहले यहां एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था , पूरा पहाड़ बरसात में बह गया था , करीब १०० स्कूली बच्चे मिटटी में ज़िंदा दफ़न हो गए थे ,
यह दो लड़के यहीं चाय पी रहे थे बरसात बहुत थी , थोड़ी देर बाद एक बड़ी चट्टान इस दड़बे पर गिरी और इसका एक हिस्सा मिटटी में मिल गया , मैं किसी तरह अपनी जान बचा पाया , लेकिन उन्हें नहीं ,
बस मुझे दिखाई नहीं देते , यदा कदा लोगों को चाय में बिस्कुट डुबो कर पीते दिखाई देते हैं , मैंने पलट कर देखा, आग और तेज़ जल रही थी , बूढ़ा आदमी ब्यास के किनारे चलते चलते ओझल हो गया
luggadbhatti is a place , some three km from Kullu on the left bank of Holy river Beas, ,A major landslide in early nineties during rains killed many.
The picture below from a very old village in uttrakhand called Bundi, on way to Aadi Kailas,
Write a comment ...